Friday, December 19, 2025

پنجابی گیت ( لابھ سنگھ کھیوا )




















ਪੰਜਾਬੀ ਸਾਹਿਤ ਦੇ ਮਾਣਮੱਤੇ ਹਸਤਾਖ਼ਰ ਡਾਕਟਰ ਲਾਭ ਸਿੰਘ ਖੀਵਾ ਹੁਰਾਂ ਦਾ ਇਕ ਗੀਤ/ گیت .......

ਤੇਰੇ ਅਸ਼ਕ 'ਚ ਜੋ ਅਕਸ ਹੈ, 
ਪਛਾਣ  ਕਿਹੜਾ  ਸ਼ਖ਼ਸ  ਹੈ।
ਜ਼ਰਾ ਮੁੱਖ ਉਠਾਕੇ ਦੇਖ ਸਹੀ , 
ਮੇਰਾ  ਦੋਸਤੀ  ਦਾ  ਦਸਤ ਹੈ।
تیرے اشک  'چ   جو  اکس  ہے،
پچھان       کِہڑا    شخص   ہے۔
ذرا مُکھّ  اُٹھاکے دیکھ  صحیح،
میرا    دوستی    دا   دست  ہے۔ 

ਦੌੜਿਆ  ਦਿਸਹੱਦਿਆਂ ਤੱਕ, 
ਇੱਕ ਮੰਜ਼ਿਲੇ-ਮਕਸੂਦ ਲਈ।
ਉੱਡਿਆ  ਨੀਲੇ  ਅੰਬਰ ਤੱਕ,
ਇੱਕ ਜੁਗਨੂੰ ਦੇ ਵਜੂਦ ਲਈ।
ਉਹ  ਮੇਰੇ ਬੁੱਕ 'ਚ  ਆਵੇ ਨਾ , 
ਉੱਤੋਂ ਸੁਬਹ ਦੀ  ਚੜ੍ਹਤ ਹੈ.....
دَوڑیا        دِسحدّیاں        تکّ،
اِکّ        منزلِ  مقصود      لئی۔
اُڈیا      نیلے        امبر       تکّ،
اِکّ جُگنوں  دے    وجود    لئی۔
اوہ  میرے    بُکّ  'چ   آوے   نہ ،
اُتوں صُبح  دی چڑھت ہے........ 

ਮੇਰੇ ਬਾਗ਼ 'ਚ ਇੱਕ ਡਾਰ ਉੱਤਰੀ,
ਕੋਇਲਾਂ    ਅਤੇ     ਮਮੋਲਾਂ   ਦੀ।
ਇੱਕ  ਕਾਂ  ਲੱਗੇ  ਜਿਉਂ ਰੀਸ ਕਰੇ, 
ਉਨ੍ਹਾਂ   ਦੇ    ਮਿੱਠੇੜੇ   ਬੋਲਾਂ  ਦੀ।
ਇਹ  ਕਹਿੰਦੀ  ਉੱਥੋਂ  ਡਾਰ  ਉੱਡੀ,
'ਇਹ ਕਿਹੜੀ ਸਿਆਹ ਵਸਤ ਹੈ?.....
میرے   باغ  'چ   اِکّ   ڈار  اُتری،
کوئلاں     اتے     ممولاں     دی۔
اکّ کاں لگّے جیوں ریس   کرے،
اُنھاں دے  مٹھیڑے   بولاں  دی۔
ایہ  کہِندی  اُتھوں    ڈار   اڈی،
'ایہ  کِہڑی   سیاہ   وسط   ہے؟....... 

ਰਹਿ ਮਹਿਲਾਂ 'ਚ ਜਾਂ  ਧੌਲਰ 'ਚ, 
ਰੂਪ-ਰੰਗ ਦਾ ਕੂੜ ਖ਼ਿਆਲ ਲੈਕੇ।
ਤੂੰ   ਵੀ   ਸੁੰਦਰਾਂ  ਵਾਂਗ  ਦੌੜੇਂਗੀ, 
ਮੋਤੀਆਂ ਦਾ ਭਰਿਆ ਥਾਲ ਲੈਕੇ।
ਸੂਰਜ   ਚੜ੍ਹਿਆ  ਜੋ  ਸਵੇਰੇ  ਸੀ,
ਹੁਣ ਦੇਖ ਹੁੰਦਾ ਅਸਤ ਹੈ........
رہِ محلاں 'چ   جاں   دھولر 'چ،
روپ-رنگ دا کُوڑ  خیال لَے کے۔
توں وی سُندراں وانگ دَوڑینگی،
موتیاں دا   بھریا  تھال لَے کے۔
سورج چڑھیا جو سویرے سی،
ہٰن دیکھ  ہُندا است  ہے........... 

ਜਦੋਂ  ਮਾਨਵ  ਆਇਆ  ਜੰਗਲ  'ਚੋਂ,
ਇਸ  ਬੰਦਸ਼ਾਂ  ਭਰੇ  ਮਾਹੌਲ   ਅੰਦਰ।
ਹੁਣ    ਹਿੰਸਾ -  ਸ਼ੈਤਾਨੀ    ਇੱਥੇ   ਵੀ, 
ਉਹ ਭੁੱਲ ਗਿਆ ਆਪਣਾ ਵੀ ਜੰਗਲ ।
ਇਹ   ਸਿਰਜੇ  ਸੱਭਿਅਕ  ਜੀਵਨ  ਦੇ, 
ਇਤਿਹਾਸ  ਦੀ ਇੱਕ ਪਰਤ  ਹੈ.......
جدوں  مانو  آیا   جنگل  'چوں،
اِس بندشاں بھرے ماحول اندر۔
ہُن  ہنسا - شیطانی   اِتھے   وی،
اوہ  بُھلّ  گیا   آپنا   وی   جنگل ۔
ایہ سِرجے سَبھِیَک  جیون  دے،
اِتہاس دی  اِکّ  پرت  ہے.......... 

ਜਦੋਂ   ਇੱਕ   ਦੇ   ਇੱਕ  ਸੁਨੇਹੇ  'ਤੇ,
ਪੰਜ ਆ ਗਏ ਸੀਸ ਕਟਾਉਣ ਲਈ।
ਹੁਣ   ਪੰਜ   ਆਵਾਜ਼ਾਂ   ਮਾਰ   ਰਹੇ,
ਇੱਕ   ਨੂੰ   ਗੱਲ   ਸੁਣਾਉਣ  ਲਈ।
ਇਹ  ਅੱਜ  ਦੇ  ਯੁੱਗ  ਦਾ  ਸੱਚ  ਹੈ,
ਤੇ  ਵਕਤ  ਦੀ  ਗਸ਼ਤ   ਹੈ .........
جدوں  اِکّ دے  اِکّ  سنیہے  'تے،
پنج  آ گئے  سیس   کٹاؤن   لئی۔
ہُن    پنج    آوازاں     مار    رہے،
اِکّ    نوں    گلّ     سناؤن    لئی۔
ایہ   اجّ  دے  یگّ   دا   سچّ   ہے،
تے   وقت   دی    گشت   ہے ...... 

ਡਾ. ਲਾਭ ਸਿੰਘ ਖੀਵਾ 
ਸੰਪਰਕ :9417178487
ڈا.لابھ سنگھ کھیوا
ਸ਼ਾਹਮੁਖੀ ਲਿਪੀਅੰਤਰ:ਅਮਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀਤ 
شاہ مُکھی لِپیآنتر: امرجیت سنگھ جیت

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